LightReader

Chapter 1 - अध्याय 1: आँगन की पहली चाय

सुबह के 6 बजे हैं। दादाजी का पुराना रेडियो धीमे स्वर में भजन बजा रहा है। घर की बड़ी बहू, माया, रसोई में पीतल के पतीले में चाय चढ़ा चुकी है। अदरक और इलायची की महक पूरे घर में फैल रही है। एक-एक करके परिवार के सभी सदस्य आँगन में जुटने लगते हैं। यहाँ कोई 'प्राइवेट स्पेस' नहीं है, पर 'प्यार का स्पेस' बहुत बड़ा है। छोटे बच्चे समीर और मीना दादाजी के पैरों के पास बैठकर उनकी पुरानी कहानियाँ सुनने का इंतज़ार कर रहे हैं। यह सिर्फ चाय का समय नहीं, बल्कि दिन भर की योजना बनाने का मंच है। हंसी-ठिठोली और छोटों का बड़ों के पैर छूना, इस घर की असली पूँजी है।

More Chapters