अध्याय 1:
प्राचीन स्मारक, जो कभी शक्ति और आशा का केंद्र था, अब एक भयंकर और निराशाजनक युद्ध का मैदान बन चुका था। चारों ओर सिर्फ़ ध्वस्त पत्थर, रक्त के धब्बे और मृत्यु की ठंडी, भयावह गंध व्याप्त थी। हीलर Jivanya (उम्र 19), जो कोमलता और जीवन शक्ति का प्रतीक थी, अपनी अंतिम ऊर्जा का एक-एक कतरा निचोड़कर घायल साथियों को पत्थरों के मलबे के पीछे हील करने में लगी थी। उसकी आँखें लगातार गिरते हुए योद्धाओं और विनाश के चरम दृश्य को देख रही थीं—यह हार स्पष्ट थी, भीषण और अपरिहार्य।
तभी, मलबे के ढेर से एक चीख़ती हुई, लेकिन आधिकारिक आवाज़ गूँजी, जिसने अंतिम आदेश दिया: "सब ख़त्म! लीडर मर चुके हैं! Riyan बुरी तरह घायल है! सामने एक अस्थिर पोर्टल खुला है, बस कूद जाओ और भागो! यह लीडर का आख़िरी आदेश है!"
यह आदेश नहीं, बल्कि एक हताश आत्मसमर्पण था। Jivanya के पास सोचने का समय नहीं था। पीछे मुड़कर देखना आत्मघाती था, क्योंकि अँधेरे की लहरें—दुश्मन के डार्क सोल्जर्स—तेज़ी से उनकी ओर बढ़ रहे थे। Jivanya को लीडर का गोपनीय प्लान याद था: अगर वे पराजित होते हैं, तो सबको डाइमेंशन छोड़कर एक साधारण जीवन जीना होगा।
उसने अपने दिल में दर्द को दबाया और पूरी ताक़त से छलांग लगाई। वह अदृश्य पोर्टल की चमकती, अस्थिर दरार में समा गई।
अगले ही पल, एक भयंकर कंपन के साथ, Jivanya खुद को ज़मीन पर बेसुध पड़ी हुई पाई। यह दुनिया बिल्कुल अलग थी: साधारण, शोरगुल भरी शहर की सड़क, तेज आवाज़ों और अनजानी रोशनी से भरी हुई। उसकी दुनिया का विनाश यहाँ किसी को पता भी नहीं था। वह सदमे और शारीरिक थकावट के कारण घंटों तक उसी अवस्था में रही, जब तक कि उसे धुँधले ढंग से होश नहीं आया।
