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Chapter 1 - “The Last System Awakener”

आसमान टूट रहा था—लाल और सुनहरी किरणों के बीच बिजली की तरह चमकते। नीचे की दुनिया कांप रही थी। धुआँ और राख में सब कुछ ढका हुआ था, और हवा में जली हुई जमीन की तिक्त गंध फैली हुई थी। इस अराजकता के बीच, एक अकेला व्यक्ति खड़ा था, बिल्कुल स्थिर।

काई की आँखें झपकी लेकर खुलीं, और उनमें अजीब सी चमक थी। उसका दिल तेज़ी से धड़क रहा था—लेकिन डर के कारण नहीं, बल्कि किसी अनजानी उम्मीद की वजह से। उसके भीतर कुछ बदल चुका था। कोई अदृश्य शक्ति उसके दिमाग में फुसफुसा रही थी:

"सिस्टम सक्रिय। स्वागत है, अंतिम जागृतकर्ता।

वह झटके से खड़ा हुआ। अपनी सामान्य जिंदगी—स्कूल, दोस्त, रोजमर्रा की चिंता—की यादें दूर होती लग रही थीं, जैसे कोई पुराना सपना जिसे याद भी करना मुश्किल हो।

अचानक उसकी नसों में ऊर्जा का एक भयंकर प्रवाह दौड़ गया। उसके सामने आँखे. Thank

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