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Chapter 2 - मेरी जिन्दगी

एक छोटी सी लडकी थी_ ज्योत्स्ना। उसकी जिन्दगी बहूत साधारण थी

लेकिन उसके सपने बहूत बड़े थे।

बार एसा

वह एक छोटे से गांव मे रहती थी, जहा सुबह सूरज की पहली किरण के साथ ,उसका दिन शूरू होता था।

ज्योत्स्ना के घर की हालत बहूत अच्छी नही थी ।

पढाई के लिए बहूत साधन नही थे,फिर भी उसके अंदर कूछ करने की आग थी।

जब बाकी बच्चे खेलते थे, वह किताबो के साथ बैठी रहती ।

उसे लगता था कि यही किताबे उसे उसकी मजिल तक पहुंचाएगी।

कई बार एसा भी होता था कि उसे समझ नही आता था कि आगे क्या करना है।

मन घबरा जाता,और लगता कि शायद वह अपने सपनो को पूरा नही कर पायेगी। लेकिन फिर वह खूद से कहती _

मेरी ज़िन्दगी आसान नही है,लेकिन मै इसे खूबसूरत बना के रहूगी।

समय धीरे धीरे बीतता गया।

उसने मेहनत करना नही छोड़ा।

रास्ते मे मूस्कीले आई,लोगो ने कहा कि यह उसके बस की बात नही है,लेकिन उसने किसी की बात नही मानी।

एक दिन एसा आया उसकी मेहनत रंग लाई। उसने अपनी पढाई मे सफलता हांसिल की ओर अपने परिवार का नाम रोशन किया।

उस दिन उसने आसमान की ओर देखकर मुस्कुराते हुए कहा_

ये मेरी ज़िन्दगी है, ओर मैने इसे अपने दम पर खुबसुरत बनाया।

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